Home » , » Sangya(Noun)(संज्ञा) | संज्ञा(Noun) के प्रकार | संज्ञाओं का प्रयोग |

Sangya(Noun)(संज्ञा) | संज्ञा(Noun) के प्रकार | संज्ञाओं का प्रयोग |

(1) जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनाना

जातिवाचक संज्ञाभाववाचक संज्ञाजातिवाचक संज्ञाभाववाचक संज्ञा
स्त्रीस्त्रीत्वभाईभाईचारा
मनुष्यमनुष्यतापुरुषपुरुषत्व, पौरुष
शास्त्रशास्त्रीयताजातिजातीयता
पशुपशुताबच्चाबचपन
दनुजदनुजतानारीनारीत्व
पात्रपात्रताबूढाबुढ़ापा
लड़कालड़कपनमित्रमित्रता
दासदासत्वपण्डितपण्डिताई
अध्यापकअध्यापनसेवकसेवा

संज्ञा सम्बंधित मुख्य प्रश्न जो अधिकाश परीक्षाओं मे आये है 
(2)विशेषण से भाववाचक संज्ञा बनाना


विशेषणभाववाचक संज्ञाविशेषणभाववाचक संज्ञा
लघुलघुता, लघुत्व, लाघववीरवीरता, वीरत्व
एकएकता, एकत्वचालाकचालाकी
खट्टाखटाईगरीबगरीबी
गँवारगँवारपनपागलपागलपन
बूढाबुढ़ापामोटामोटापा
नवाबनवाबीदीनदीनता, दैन्य
बड़ाबड़ाईसुंदरसौंदर्य, सुंदरता
भलाभलाईबुराबुराई
ढीठढिठाईचौड़ाचौड़ाई
लाललाली, लालिमाबेईमानबेईमानी
सरलसरलता, सारल्यआवश्यकताआवश्यकता
परिश्रमीपरिश्रमअच्छाअच्छाई
गंभीरगंभीरता, गांभीर्यसभ्यसभ्यता
स्पष्टस्पष्टताभावुकभावुकता
अधिकअधिकता, आधिक्यगर्मगर्मी
सर्दसर्दीकठोरकठोरता
मीठामिठासचतुरचतुराई
सफेदसफेदीश्रेष्ठश्रेष्ठता
मूर्खमूर्खताराष्ट्रीयराष्ट्रीयता



(3)क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाना



क्रियाभाववाचक संज्ञाक्रियाभाववाचक संज्ञा
खोजनाखोजसीनासिलाई
जीतनाजीतरोनारुलाई
लड़नालड़ाईपढ़नापढ़ाई
चलनाचाल, चलनपीटनापिटाई
देखनादिखावा, दिखावटसमझनासमझ
सींचनासिंचाईपड़नापड़ाव
पहननापहनावाचमकनाचमक
लूटनालूटजोड़नाजोड़
घटनाघटावनाचनानाच
बोलनाबोलपूजनापूजन
झूलनाझूलाजोतनाजुताई
कमानाकमाईबचनाबचाव
रुकनारुकावटबननाबनावट
मिलनामिलावटबुलानाबुलावा
भूलनाभूलछापनाछापा, छपाई
बैठनाबैठक, बैठकीबढ़नाबाढ़
घेरनाघेराछींकनाछींक
फिसलनाफिसलनखपनाखपत
रँगनारँगाई, रंगतमुसकानामुसकान
उड़नाउड़ानघबरानाघबराहट
मुड़नामोड़सजानासजावट
चढ़नाचढाईबहनाबहाव
मारनामारदौड़नादौड़
गिरनागिरावटकूदनाकूद

संज्ञा सम्बंधित मुख्य प्रश्न जो अधिकाश परीक्षाओं मे आये है 
(4) संज्ञा से विशेषण बनाना


संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
अंतअंतिम, अंत्यअर्थआर्थिक
अवश्यआवश्यकअंशआंशिक
अभिमानअभिमानीअनुभवअनुभवी
इच्छाऐच्छिकइतिहासऐतिहासिक
ईश्र्वरईश्र्वरीयउपजउपजाऊ
उन्नतिउन्नतकृपाकृपालु
कामकामी, कामुककालकालीन
कुलकुलीनकेंद्रकेंद्रीय
क्रमक्रमिककागजकागजी
किताबकिताबीकाँटाकँटीला
कंकड़कंकड़ीलाकमाईकमाऊ
क्रोधक्रोधीआवासआवासीय
आसमानआसमानीआयुआयुष्मान
आदिआदिमअज्ञानअज्ञानी
अपराधअपराधीचाचाचचेरा
जवाबजवाबीजहरजहरीला
जातिजातीयजंगलजंगली
झगड़ाझगड़ालूतालुतालव्य
तेलतेलहादेशदेशी
दानदानीदिनदैनिक
दयादयालुदर्ददर्दनाक
दूधदुधिया, दुधारधनधनी, धनवान
धर्मधार्मिकनीतिनैतिक
खपड़ाखपड़ैलखेलखेलाड़ी
खर्चखर्चीलाखूनखूनी
गाँवगँवारू, गँवारगठनगठीला
गुणगुणी, गुणवानघरघरेलू
घमंडघमंडीघावघायल
चुनावचुनिंदा, चुनावीचारचौथा
पश्र्चिमपश्र्चिमीपूर्वपूर्वी
पेटपेटूप्यारप्यारा
प्यासप्यासापशुपाशविक
पुस्तकपुस्तकीयपुराणपौराणिक
प्रमाणप्रमाणिकप्रकृतिप्राकृतिक
पितापैतृकप्रांतप्रांतीय
बालकबालकीयबर्फबर्फीला
भ्रमभ्रामक, भ्रांतभोजनभोज्य
भूगोलभौगोलिकभारतभारतीय
मनमानसिकमासमासिक
माहमाहवारीमातामातृक
मुखमौखिकनगरनागरिक
नियमनियमितनामनामी, नामक
निश्र्चयनिश्र्चितन्यायन्यायी
नौनाविकनमकनमकीन
पाठपाठ्यपूजापूज्य, पूजित
पीड़ापीड़ितपत्थरपथरीला
पहाड़पहाड़ीरोगरोगी
राष्ट्रराष्ट्रीयरसरसिक
लोकलौकिकलोभलोभी
वेदवैदिकवर्षवार्षिक
व्यापरव्यापारिकविषविषैला
विस्तारविस्तृतविवाहवैवाहिक
विज्ञानवैज्ञानिकविलासविलासी
विष्णुवैष्णवशरीरशारीरिक
शास्त्रशास्त्रीयसाहित्यसाहित्यिक
समयसामयिकस्वभावस्वाभाविक
सिद्धांतसैद्धांतिकस्वार्थस्वार्थी
स्वास्थ्यस्वस्थस्वर्णस्वर्णिम
मामाममेरामर्दमर्दाना
मैलमैलामधुमधुर
रंगरंगीन, रँगीलारोजरोजाना
सालसालानासुखसुखी
समाजसामाजिकसंसारसांसारिक
स्वर्गस्वर्गीय, स्वर्गिकसप्ताहसप्ताहिक
समुद्रसामुद्रिक, समुद्रीसंक्षेपसंक्षिप्त
सुरसुरीलासोनासुनहरा
क्षणक्षणिकहवाहवाई


(5) क्रिया से विशेषण बनाना

क्रियाविशेषणक्रियाविशेषण
लड़नालड़ाकूभागनाभगोड़ा
अड़नाअड़ियलदेखनादिखाऊ
लूटनालुटेराभूलनाभुलक्कड़
पीनापियक्कड़तैरनातैराक
जड़नाजड़ाऊगानागवैया
पालनापालतूझगड़नाझगड़ालू
टिकनाटिकाऊचाटनाचटोर
बिकनाबिकाऊपकनापका

संज्ञा सम्बंधित मुख्य प्रश्न जो अधिकाश परीक्षाओं मे आये है 
(6) सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा बनाना


सर्वनामभाववाचक संज्ञासर्वनामभाववाचक संज्ञा
अपनाअपनापन /अपनावममममता/ ममत्व
निजनिजत्व, निजतापरायापरायापन
स्वस्वत्वसर्वसर्वस्व
अहंअहंकारआपआपा



(7)क्रिया विशेषण से भाववाचक संज्ञा

मन्द- मन्दी;
दूर- दूरी; 
तीव्र- तीव्रता;
शीघ्र- शीघ्रता इत्यादि।

(8) अव्यय से भाववाचक संज्ञा

परस्पर- पारस्पर्य;
समीप- सामीप्य;
निकट- नैकट्य;
शाबाश- शाबाशी;
वाहवाह- वाहवाही 
धिक्- धिक्कार 
शीघ्र- शीघ्रता


समूहवाचक संज्ञा :- जिस संज्ञा शब्द से वस्तुअों के समूह या समुदाय का बोध हो, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते है।
जैसे- व्यक्तियों का समूह- भीड़, जनता, सभा, कक्षा; वस्तुओं का समूह- गुच्छा, कुंज, मण्डल, घौद।

द्रव्यवाचक संज्ञा :-जिस संज्ञा से नाप-तौलवाली वस्तु का बोध हो, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है।
दूसरे शब्दों में- जिन संज्ञा शब्दों से किसी धातु, द्रव या पदार्थ का बोध हो, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। 
जैसे- ताम्बा, पीतल, चावल, घी, तेल, सोना, लोहा आदि।


संज्ञाओं का प्रयोग

संज्ञाओं के प्रयोग में कभी-कभी उलटफेर भी हो जाया करता है। कुछ उदाहरण यहाँ दिये जा रहे है-

(क) जातिवाचक : व्यक्तिवाचक- कभी- कभी जातिवाचक संज्ञाओं का प्रयोग व्यक्तिवाचक संज्ञाओं में होता है। जैसे- 'पुरी' से जगत्राथपुरी का 'देवी' से दुर्गा का, 'दाऊ' से कृष्ण के भाई बलदेव का, 'संवत्' से विक्रमी संवत् का, 'भारतेन्दु' से बाबू हरिश्र्चन्द्र का और 'गोस्वामी' से तुलसीदासजी का बोध होता है। इसी तरह बहुत-सी योगरूढ़ संज्ञाएँ मूल रूप से जातिवाचक होते हुए भी प्रयोग में व्यक्तिवाचक के अर्थ में चली आती हैं। जैसे- गणेश, हनुमान, हिमालय, गोपाल इत्यादि।

(ख) व्यक्तिवाचक : जातिवाचक- कभी-कभी व्यक्तिवाचक संज्ञा का प्रयोग जातिवाचक (अनेक व्यक्तियों के अर्थ) में होता है। ऐसा किसी व्यक्ति का असाधारण गुण या धर्म दिखाने के लिए किया जाता है। ऐसी अवस्था में व्यक्तिवाचक संज्ञा जातिवाचक संज्ञा में बदल जाती है। जैसे- गाँधी अपने समय के कृष्ण थे; यशोदा हमारे घर की लक्ष्मी है; तुम कलियुग के भीम हो इत्यादि।

(ग) भाववाचक : जातिवाचक- कभी-कभी भाववाचक संज्ञा का प्रयोग जातिवाचक संज्ञा में होता है। उदाहरणार्थ- ये सब कैसे अच्छे पहरावे है। यहाँ 'पहरावा' भाववाचक संज्ञा है, किन्तु प्रयोग जातिवाचक संज्ञा में हुआ। 'पहरावे' से 'पहनने के वस्त्र' का बोध होता है।


संज्ञा के रूपान्तर (लिंग, वचन और कारक में सम्बन्ध)
संज्ञा विकारी शब्द है। विकार शब्दरूपों को परिवर्तित अथवा रूपान्तरित करता है। संज्ञा के रूप लिंग, वचन और कारक चिह्नों (परसर्ग) के कारण बदलते हैं।

लिंग के अनुसार

नर खाता है- नारी खाती है। 
लड़का खाता है- लड़की खाती है।

इन वाक्यों में 'नर' पुंलिंग है और 'नारी' स्त्रीलिंग। 'लड़का' पुंलिंग है और 'लड़की' स्त्रीलिंग। इस प्रकार, लिंग के आधार पर संज्ञाओं का रूपान्तर होता है।
वचन के अनुसार

लड़का खाता है- लड़के खाते हैं। 
लड़की खाती है- लड़कियाँ खाती हैं। 
एक लड़का जा रहा है- तीन लड़के जा रहे हैं।

इन वाक्यों में 'लड़का' शब्द एक के लिए आया है और 'लड़के' एक से अधिक के लिए। 'लड़की' एक के लिए और 'लड़कियाँ' एक से अधिक के लिए व्यवहृत हुआ है। यहाँ संज्ञा के रूपान्तर का आधार 'वचन' है। 'लड़का' एकवचन है और 'लड़के' बहुवचन में प्रयुक्त हुआ है।

कारक- चिह्नों के अनुसार

लड़का खाना खाता है- लड़के ने खाना खाया। 
लड़की खाना खाती है- लड़कियों ने खाना खाया।

इन वाक्यों में 'लड़का खाता है' में 'लड़का' पुंलिंग एकवचन है और 'लड़के ने खाना खाया' में भी 'लड़के' पुंलिंग एकवचन है, पर दोनों के रूप में भेद है। इस रूपान्तर का कारण कर्ता कारक का चिह्न 'ने' है, जिससे एकवचन होते हुए भी 'लड़के' रूप हो गया है। इसी तरह, लड़के को बुलाओ, लड़के से पूछो, लड़के का कमरा, लड़के के लिए चाय लाओ इत्यादि वाक्यों में संज्ञा (लड़का-लड़के) एकवचन में आयी है। इस प्रकार, संज्ञा बिना कारक-चिह्न के भी होती है और कारक चिह्नों के साथ भी। दोनों स्थितियों में संज्ञाएँ एकवचन में अथवा बहुवचन में प्रयुक्त होती है। उदाहरणार्थ-

बिना कारक-चिह्न के- लड़के खाना खाते हैं। (बहुवचन)
लड़कियाँ खाना खाती हैं। (बहुवचन)

कारक-चिह्नों के साथ- लड़कों ने खाना खाया। 
लड़कियों ने खाना खाया। 
लड़कों से पूछो। 
लड़कियों से पूछो। 
इस प्रकार, संज्ञा का रूपान्तर लिंग, वचन और कारक के कारण होता है।


Click Here For " More Detail for any Problem Click Bellow Link

For Any Suggestion or any query please drop any comment in comment box we will try to solve the problem. IF You are More Information or latest updates Please visit our official website regularly and you may get the information about Result , Current vacancy, Current Recruitment , Notification, Exam Date , Exam admit Card many other aspect of life. Please visit regularly Our official website is www.akresults.in

0 comments:

Latest Vacancy / Admit / Result

Smiley face