Sarvnam(Pronoun)(सर्वनाम) | सर्वनाम के भेद- अनिश्चयवाचक, संबंधवाचक, प्रश्नवाचक सर्वनाम


('कोई' अनिश्चयवाचक सर्वनाम)

कारक एकवचनबहुवचन
कर्ता कोई, किसनेकिन्हीं ने
कर्म किसी कोकिन्हीं को
करण किसी सेकिन्हीं से
सम्प्रदान किसी को, किसी के लिएकिन्हीं को, किन्हीं के लिए
अपादान किसी सेकिन्हीं से
सम्बन्ध किसी का, किसी की, किसी केकिन्हीं का, किन्हीं की, किन्हीं के
अधिकरण किसी में, किसी परकिन्हीं में, किन्हीं पर

सर्वनाम  सम्बंधित मुख्य प्रश्न जो अधिकाश परीक्षाओं मे आये है 

('जो' संबंधवाचक सर्वनाम)

कारक एकवचनबहुवचन
कर्ता जो, जिसनेजो, जिन्होंने
कर्म जिसे, जिसकोजिन्हें, जिनको
करण जिससे, जिसके द्वाराजिनसे, जिनके द्वारा
सम्प्रदान जिसको, जिसके लिएजिनको, जिनके लिए
अपादान जिससे (अलग होने) जिनसे (अलग होने)
सम्बन्ध जिसका, जिसकी, जिसकेजिनका, जिनकी, जिनके
अधिकरण जिसपर, जिसमेंजिनपर, जिनमें

सर्वनाम  सम्बंधित मुख्य प्रश्न जो अधिकाश परीक्षाओं मे आये है 

('कौन' प्रश्नवाचक सर्वनाम)

कारक एकवचनबहुवचन
कर्ता कौन, किसनेकौन, किन्होंने
कर्म किसे, किसको, किसकेकिन्हें, किनको, किनके
करण किससे, किसके द्वाराकिनसे, किनके द्वारा
सम्प्रदान किसके लिए, किसकोकिनके लिए, किनको
अपादान किससे (अलग होने) किनसे (अलग होने)
सम्बन्ध किसका, किसकी, किसकेकिनका, किनकी, किनके
अधिकरण किसपर, किसमेंकिनपर, किनमें



सर्वनाम का पद-परिचय

सर्वनाम का पद-परिचय करते समय सर्वनाम, सर्वनाम का भेद, पुरुष, लिंग, वचन, कारक और अन्य पदों से उसका सम्बन्ध बताना पड़ता है।

उदाहरण- वह अपना काम करता है।

इस वाक्य में, 'वह' और 'अपना' सर्वनाम है। इनका पद-परिचय होगा-

वह- पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, पुलिंग, एकवचन, कर्ताकारक, 'करता है' क्रिया का कर्ता।

अपना- निजवाचक सर्वनाम, अन्यपुरुष, पुंलिंग, एकवचन, सम्बन्धकारक, 'काम' संज्ञा का विशेषण।

Sarvnam(Pronoun)सर्वनाम के रूपान्तर (लिंग, वचन और कारक) | अन्य पुरुषवाचक,निश्चयवाचक सर्वनाम

('वह' अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्ता वह, उसनेवे, उन्होंने
कर्म उसे, उसकोउन्हें, उनको
करण उससे, उसके द्वाराउनसे, उनके द्वारा
सम्प्रदान उसको, उसे, उसके लिएउनको, उन्हें, उनके लिए
अपादान उससेउनसे
सम्बन्ध उसका, उसकी, उसकेउनका, उनकी, उनके
अधिकरण उसमें, उसपरउनमें, उनपर


सर्वनाम  सम्बंधित मुख्य प्रश्न जो अधिकाश परीक्षाओं मे आये है 

('यह' निश्चयवाचक सर्वनाम)

कारक एकवचनबहुवचन
कर्ता यह, इसनेये, इन्होंने
कर्म इसको, इसेये, इनको, इन्हें
करण इससेइनसे
सम्प्रदान इसे, इसकोइन्हें, इनको
अपादान इससेइनसे
सम्बन्ध इसका, की, केइनका, की, के
अधिकरण इसमें, इसपरइनमें, इनपर

('आप' आदरसूचक)

कारक एकवचनबहुवचन
कर्ता आपनेआपलोगों ने
कर्म आपकोआपलोगों को
करण आपसेआपलोगों से
सम्प्रदान आपको, के लिएआपलोगों को, के लिए
अपादान आपसेआपलोगों से
सम्बन्ध आपका, की, केआपलोगों का, की, के
अधिकरण आप में, परआपलोगों में, पर

सर्वनाम के रूपान्तर (लिंग, वचन और कारक) | उत्तम पुरुषवाचक ,मध्यम पुरुषवाचक, सर्वनाम


सर्वनाम के रूपान्तर (लिंग, वचन और कारक)

सर्वनाम का रूपान्तर पुरुष, वचन और कारक की दृष्टि से होता है। इनमें लिंगभेद के कारण रूपान्तर नहीं होता। जैसे-
वह खाता है।
वह खाती है।

संज्ञाओं के समान सर्वनाम के भी दो वचन होते हैं- एकवचन और बहुवचन।
पुरुषवाचक और निश्र्चयवाचक सर्वनाम को छोड़ शेष सर्वनाम विभक्तिरहित बहुवचन में एकवचन के समान रहते हैं।

सर्वनाम में केवल सात कारक होते है। सम्बोधन कारक नहीं होता। 

कारकों की विभक्तियाँ लगने से सर्वनामों के रूप में विकृति आ जाती है। जैसे-

मैं- मुझको, मुझे, मुझसे, मेरा; तुम- तुम्हें, तुम्हारा; हम- हमें, हमारा; वह- उसने, उसको उसे, उससे, उसमें, उन्होंने, उनको; यह- इसने, इसे, इससे, इन्होंने, इनको, इन्हें, इनसे; कौन- किसने, किसको, किसे।
सर्वनाम की कारक-रचना (रूप-रचना)

संज्ञा शब्दों की भाँति ही सर्वनाम शब्दों की भी रूप-रचना होती। सर्वनाम शब्दों के प्रयोग के समय जब इनमें कारक चिह्नों का प्रयोग करते हैं, तो इनके रूप में परिवर्तन आ जाता है।


('मैं' उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्ता मैं, मैंनेहम, हमने
कर्म मुझे, मुझकोहमें, हमको
करण मुझसेहमसे
सम्प्रदान मुझे, मेरे लिएहमें, हमारे लिए
अपादान मुझसेहमसे
सम्बन्ध मेरा, मेरे, मेरीहमारा, हमारे, हमारी
अधिकरण मुझमें, मुझपर हममें, हमपर

('तू', 'तुम' मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम)

कारक एकवचनबहुवचन
कर्ता तू, तूनेतुम, तुमने, तुमलोगों ने
कर्म तुझको, तुझेतुम्हें, तुमलोगों को
करण तुझसे, तेरे द्वारातुमसे, तुम्हारे से, तुमलोगों से
सम्प्रदान तुझको, तेरे लिए, तुझेतुम्हें, तुम्हारे लिए, तुमलोगों के लिए
अपादान तुझसेतुमसे, तुमलोगों से
सम्बन्ध तेरा, तेरी, तेरेतुम्हारा-री, तुमलोगों का-की
अधिकरण तुझमें, तुझपरतुममें, तुमलोगों में-पर

Sarvnam(Pronoun)(सर्वनाम) | सर्वनाम के भेद- निश्चयवाचक , अनिश्चयवाचक सर्वनाम


 (2) निश्चयवाचक सर्वनाम :- सर्वनाम के जिस रूप से हमे किसी बात या वस्तु का निश्चत रूप से बोध होता है, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते है।
दूसरे शब्दों में- जिस सर्वनाम से वक्ता के पास या दूर की किसी वस्तु के निश्र्चय का बोध होता है, उसे 'निश्र्चयवाचक सर्वनाम' कहते हैं।

सरल शब्दों में- जो सर्वनाम शब्द किसी निश्चित व्यक्ति, वस्तु अथवा घटना की ओर संकेत करे, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
जैसे- यह, वह, ये, वे आदि।

उदाहरण- पास की वस्तु के लिए- 'यह' कोई नया काम नहीं है; दूर की वस्तु के लिए- रोटी मत खाओ, क्योंकि 'वह' जली है।

(3) अनिश्चयवाचक सर्वनाम:-जिस सर्वनाम शब्द से किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध न हो, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते है।
जैसे- कोई, कुछ, किसी आदि।

उदाहरण- 'कोई'- ऐसा न हो कि 'कोई' आ जाय;
'कुछ'- उसने 'कुछ' नहीं खाया।

Sarvnam(Pronoun)(सर्वनाम) | सर्वनाम के भेद- संबंधवाचक , प्रश्नवाचक , निजवाचक सर्वनाम


(4)संबंधवाचक सर्वनाम :-जिन सर्वनाम शब्दों का दूसरे सर्वनाम शब्दों से संबंध ज्ञात हो तथा जो शब्द दो वाक्यों को जोड़ते है, उन्हें संबंधवाचक सर्वनाम कहते है।
जैसे- जो, जिसकी, सो, जिसने, जैसा, वैसा आदि।

उदाहरण- जैसा करेगा वैसा भरेगा।
जो परिश्रम करते हैं, वे सुखी रहते हैं।
वह 'जो' न करे, 'सो' थोड़ा

(5)प्रश्नवाचक सर्वनाम :-जो सर्वनाम शब्द सवाल पूछने के लिए प्रयुक्त होते है, उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते है।
सरल शब्दों में- प्रश्र करने के लिए जिन सर्वनामों का प्रयोग होता है, उन्हें 'प्रश्रवाचक सर्वनाम' कहते है।
जैसे- कौन, क्या, किसने आदि।

उदाहरण- टोकरी में क्या रखा है।
बाहर कौन खड़ा है।
तुम क्या खा रहे हो ?

यहाँ पर यह ध्यान रखना चाहिए कि 'कौन' का प्रयोग चेतन जीवों के लिए और 'क्या' का प्रयोग जड़ पदार्थो के लिए होता है।

(6) निजवाचक सर्वनाम :-'निज' का अर्थ होता है- अपना और 'वाचक का अर्थ होता है- बोध (ज्ञान) कराने वाला अर्थात 'निजवाचक' का अर्थ हुआ- अपनेपन का बोध कराना।

इस प्रकार,

जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कर्ता के साथ अपनेपन का ज्ञान कराने के लिए किया जाए, उन्हें निजवाचक सर्वनाम कहते है।
जैसे- अपने आप, निजी, खुद आदि।
'आप' शब्द का प्रयोग पुरुषवाचक तथा निजवाचक सर्वनाम-दोनों में होता है।
उदाहरण-
आप कल दफ्तर नहीं गए थे। (मध्यम पुरुष- आदरसूचक)
आप मेरे पिता श्री बसंत सिंह हैं। (अन्य पुरुष-आदरसूचक-परिचय देते समय)
ईश्वर भी उन्हीं का साथ देता है, जो अपनी मदद आप करता है। (निजवाचक सर्वनाम)

'निजवाचक सर्वनाम' का रूप 'आप' है। लेकिन पुरुषवाचक के अन्यपुरुषवाले 'आप' से इसका प्रयोग बिलकुल अलग है। यह कर्ता का बोधक है, पर स्वयं कर्ता का काम नहीं करता। पुरुषवाचक 'आप' बहुवचन में आदर के लिए प्रयुक्त होता है। जैसे- आप मेरे सिर-आखों पर है; आप क्या राय देते है ? किन्तु, निजवाचक 'आप' एक ही तरह दोनों वचनों में आता है और तीनों पुरुषों में इसका प्रयोग किया जा सकता है।

निजवाचक सर्वनाम 'आप' का प्रयोग निम्नलिखित अर्थो में होता है-

(क) निजवाचक 'आप' का प्रयोग किसी संज्ञा या सर्वनाम के अवधारण (निश्र्चय) के लिए होता है। जैसे- मैं 'आप' वहीं से आया हूँ; मैं 'आप' वही कार्य कर रहा हूँ।

(ख) निजवाचक 'आप' का प्रयोग दूसरे व्यक्ति के निराकरण के लिए भी होता है। जैसे- उन्होंने मुझे रहने को कहा और 'आप' चलते बने; वह औरों को नहीं, 'अपने' को सुधार रहा है।

(ग) सर्वसाधारण के अर्थ में भी 'आप' का प्रयोग होता है। जैसे- 'आप' भला तो जग भला; 'अपने' से बड़ों का आदर करना उचित है।

(घ) अवधारण के अर्थ में कभी-कभी 'आप' के साथ 'ही' जोड़ा जाता है। जैसे- मैं 'आप ही' चला आता था; यह काम 'आप ही'; मैं यह काम 'आप ही' कर लूँगा।
संयुक्त सर्वनाम

रूस के हिन्दी वैयाकरण डॉ० दीमशित्स ने एक और प्रकार के सर्वनाम का उल्लेख किया है और उसे 'संयुक्त सर्वनाम' कहा है। उन्हीं के शब्दों में, 'संयुक्त सर्वनाम' पृथक श्रेणी के सर्वनाम हैं। सर्वनाम के सब भेदों से इनकी भित्रता इसलिए है, क्योंकि उनमें एक शब्द नहीं, बल्कि एक से अधिक शब्द होते हैं। संयुक्त सर्वनाम स्वतन्त्र रूप से या संज्ञा-शब्दों के साथ भी प्रयुक्त होता है।

इसका उदाहरण कुछ इस प्रकार है- जो कोई, सब कोई, हर कोई, और कोई, कोई और, जो कुछ, सब कुछ, और कुछ, कुछ और, कोई एक, एक कोई, कोई भी, कुछ एक, कुछ भी, कोई-न-कोई, कुछ-न-कुछ, कुछ-कुछ, कोई-कोई इत्यादि।

Sarvnam (Pronoun) (सर्वनाम) | सर्वनाम (Pronoun)की परिभाषा | सर्वनाम के भेद -पुरुषवाचक सर्वनाम


पुरुषवाचक सर्वनाम

(1) पुरुषवाचक सर्वनाम:-जिन सर्वनाम शब्दों से व्यक्ति का बोध होता है, उन्हें पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है।

दूसरे शब्दों में- बोलने वाले, सुनने वाले तथा जिसके विषय में बात होती है, उनके लिए प्रयोग किए जाने वाले सर्वनाम पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।



'पुरुषवाचक सर्वनाम' पुरुषों (स्त्री या पुरुष) के नाम के बदले आते हैं।

जैसे- मैं आता हूँ। तुम जाते हो। वह भागता है।

उपर्युक्त वाक्यों में 'मैं, तुम, वह' पुरुषवाचक सर्वनाम हैं।



पुरुषवाचक सर्वनाम के प्रकार



पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते है-

(i)उत्तम पुरुष (ii)मध्यम पुरुष (iii)अन्य पुरुष



(i)उत्तम पुरुष :-जिन सर्वनामों का प्रयोग बोलने वाला अपने लिए करता है, उन्हें उत्तम पुरुष कहते है।

जैसे- मैं, हमारा, हम, मुझको, हमारी, मैंने, मेरा, मुझे आदि।



उदाहरण- मैं स्कूल जाऊँगा।

हम मतदान नहीं करेंगे।

यह कविता मैंने लिखी है।

बारिश में हमारी पुस्तकें भीग गई।

मैंने उसे धोखा नहीं दिया।



(ii) मध्यम पुरुष :-जिन सर्वनामों का प्रयोग सुनने वाले के लिए किया जाता है, उन्हें मध्यम पुरुष कहते है।

जैसे- तू, तुम, तुम्हे, आप, तुम्हारे, तुमने, आपने आदि।



उदाहरण- तुमने गृहकार्य नहीं किया है।

तुम सो जाओ।

तुम्हारे पिता जी क्या काम करते हैं ?

तू घर देर से क्यों पहुँचा ?

तुमसे कुछ काम है।



(iii)अन्य पुरुष:-जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किसी अन्य व्यक्ति के लिए किया जाता है, उन्हें अन्य पुरुष कहते है।

जैसे- वे, यह, वह, इनका, इन्हें, उसे, उन्होंने, इनसे, उनसे आदि।



उदाहरण- वे मैच नही खेलेंगे।

उन्होंने कमर कस ली है।

वह कल विद्यालय नहीं आया था।

उसे कुछ मत कहना।

उन्हें रोको मत, जाने दो।

इनसे कहिए, अपने घर जाएँ।

Sarvnam(Pronoun)(सर्वनाम) | सर्वनाम (Pronoun)की परिभाषा | सर्वनाम के भेद



Sarvnam(Pronoun)(सर्वनाम)

सर्वनाम (Pronoun)की परिभाषा



जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा के स्थान पर किया जाता है, उन्हें सर्वनाम कहते है।

दूसरे शब्दों में- सर्वनाम उस विकारी शब्द को कहते है, जो पूर्वापरसंबध से किसी भी संज्ञा के बदले आता है।



सरल शब्दों में- सर्व (सब) नामों (संज्ञाओं) के बदले जो शब्द आते है, उन्हें 'सर्वनाम' कहते हैं।

सर्वनाम यानी सबके लिए नाम। इसका प्रयोग संज्ञा के स्थान पर किया जाता है। आइए देखें, कैसे? राधा सातवीं कक्षा में पढ़ती है। वह पढ़ाई में बहुत तेज है। उसके सभी मित्र उससे प्रसन्न रहते हैं। वह कभी-भी स्वयं पर घमंड नहीं करती। वह अपने माता-पिता का आदर करती है।

आपने देखा कि ऊपर लिखे अनुच्छेद में राधा के स्थान पर वह, उसके, उससे, स्वयं, अपने आदि शब्दों का प्रयोग हुआ है। अतः ये सभी शब्द सर्वनाम हैं।



इस प्रकार,

संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।



मै, तू, वह, आप, कोई, यह, ये, वे, हम, तुम, कुछ, कौन, क्या, जो, सो, उसका आदि सर्वनाम शब्द हैं। अन्य सर्वनाम शब्द भी इन्हीं शब्दों से बने हैं, जो लिंग, वचन, कारक की दृष्टि से अपना रूप बदलते हैं; जैसे-



राधा नृत्य करती है। राधा का गाना भी अच्छा होता है। राधा गरीबों की मदद करती है।

राधा नृत्य करती है। उसका गाना भी अच्छा होता है। वह गरीबों की मदद करती है।

आप- अपना, यह- इस, इसका, वह- उस, उसका।



अन्य उदाहरण

(1)'सुभाष' एक विद्यार्थी है।

(2)वह (सुभाष) रोज स्कूल जाता है।

(3)उसके (सुभाष के) पास सुन्दर बस्ता है।

(4)उसे (सुभाष को )घूमना बहुत पसन्द है।



उपयुक्त वाक्यों में 'सुभाष' शब्द संज्ञा है तथा इसके स्थान पर वह, उसके, उसे शब्द संज्ञा (सुभाष) के स्थान पर प्रयोग किये गए है। इसलिए ये सर्वनाम है।



संज्ञा की अपेक्षा सर्वनाम की विलक्षणता यह है कि संज्ञा से जहाँ उसी वस्तु का बोध होता है, जिसका वह (संज्ञा) नाम है, वहाँ सर्वनाम में पूर्वापरसम्बन्ध के अनुसार किसी भी वस्तु का बोध होता है। 'लड़का' कहने से केवल लड़के का बोध होता है, घर, सड़क आदि का बोध नहीं होता; किन्तु 'वह' कहने से पूर्वापरसम्बन्ध के अनुसार ही किसी वस्तु का बोध होता है।





सर्वनाम के भेद

सर्वनाम के छ: भेद होते है-

(1)पुरुषवाचक सर्वनाम (personal pronoun)

(2)निश्चयवाचक सर्वनाम (demonstrative pronoun)

(3)अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite pronoun)

(4)संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun)

(5)प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun)

(6)निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun)

Sangya(Noun)(संज्ञा) | संज्ञा(Noun)की परिभाषा

Sangya(Noun)(संज्ञा)

संज्ञा(Noun)की परिभाषा


संज्ञा उस विकारी शब्द को कहते है, जिससे किसी विशेष वस्तु, भाव और जीव के नाम का बोध हो, उसे संज्ञा कहते है। 
दूसरे शब्दों में- किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, गुण या भाव के नाम को संज्ञा कहते है।

जैसे- प्राणियों के नाम- मोर, घोड़ा, अनिल, किरण, जवाहरलाल नेहरू आदि।

वस्तुओ के नाम- अनार, रेडियो, किताब, सन्दूक, आदि।

स्थानों के नाम- कुतुबमीनार, नगर, भारत, मेरठ आदि

भावों के नाम- वीरता, बुढ़ापा, मिठास आदि

यहाँ 'वस्तु' शब्द का प्रयोग व्यापक अर्थ में हुआ है, जो केवल वाणी और पदार्थ का वाचक नहीं, वरन उनके धर्मो का भी सूचक है। 
साधारण अर्थ में 'वस्तु' का प्रयोग इस अर्थ में नहीं होता। अतः वस्तु के अन्तर्गत प्राणी, पदार्थ और धर्म आते हैं। इन्हीं के आधार पर संज्ञा के भेद किये गये हैं।


संज्ञा के भेद
संज्ञा के पाँच भेद होते है-
(1)व्यक्तिवाचक (proper noun ) 
(2)जातिवाचक (common noun)
(3)भाववाचक (abstract noun)
(4)समूहवाचक (collective noun)
(5)द्रव्यवाचक (material noun)


(1)व्यक्तिवाचक संज्ञा:-जिस शब्द से किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान के नाम का बोध हो उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। 
जैसे-
व्यक्ति का नाम-रवीना, सोनिया गाँधी, श्याम, हरि, सुरेश, सचिन आदि।

वस्तु का नाम- कार, टाटा चाय, कुरान, गीता रामायण आदि।

स्थान का नाम-ताजमहल, कुतुबमीनार, जयपुर आदि।

दिशाओं के नाम- उत्तर, पश्र्चिम, दक्षिण, पूर्व।

देशों के नाम- भारत, जापान, अमेरिका, पाकिस्तान, बर्मा।

राष्ट्रीय जातियों के नाम- भारतीय, रूसी, अमेरिकी।

समुद्रों के नाम- काला सागर, भूमध्य सागर, हिन्द महासागर, प्रशान्त महासागर।

नदियों के नाम- गंगा, ब्रह्मपुत्र, बोल्गा, कृष्णा, कावेरी, सिन्धु।

पर्वतों के नाम- हिमालय, विन्ध्याचल, अलकनन्दा, कराकोरम।

नगरों, चौकों और सड़कों के नाम- वाराणसी, गया, चाँदनी चौक, हरिसन रोड, अशोक मार्ग।

पुस्तकों तथा समाचारपत्रों के नाम- रामचरितमानस, ऋग्वेद, धर्मयुग, इण्डियन नेशन, आर्यावर्त।

ऐतिहासिक युद्धों और घटनाओं के नाम- पानीपत की पहली लड़ाई, सिपाही-विद्रोह, अक्तूबर-क्रान्ति।

दिनों, महीनों के नाम- मई, अक्तूबर, जुलाई, सोमवार, मंगलवार।

त्योहारों, उत्सवों के नाम- होली, दीवाली, रक्षाबन्धन, विजयादशमी।

(2) जातिवाचक संज्ञा :- बच्चा, जानवर, नदी, अध्यापक, बाजार, गली, पहाड़, खिड़की, स्कूटर आदि शब्द एक ही प्रकार प्राणी, वस्तु और स्थान का बोध करा रहे हैं। इसलिए ये 'जातिवाचक संज्ञा' हैं।

इस प्रकार-

जिस शब्द से किसी जाति के सभी प्राणियों या प्रदार्थो का बोध होता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते है।

जैसे- लड़का, पशु-पक्षयों, वस्तु, नदी, मनुष्य, पहाड़ आदि।

'लड़का' से राजेश, सतीश, दिनेश आदि सभी 'लड़कों का बोध होता है।

'पशु-पक्षयों' से गाय, घोड़ा, कुत्ता आदि सभी जाति का बोध होता है।

'वस्तु' से मकान कुर्सी, पुस्तक, कलम आदि का बोध होता है।

'नदी' से गंगा यमुना, कावेरी आदि सभी नदियों का बोध होता है।

'मनुष्य' कहने से संसार की मनुष्य-जाति का बोध होता है।

'पहाड़' कहने से संसार के सभी पहाड़ों का बोध होता हैं।

(3)भाववाचक संज्ञा :- थकान, मिठास, बुढ़ापा, गरीबी, आजादी, हँसी, चढ़ाई, साहस, वीरता आदि शब्द-भाव, गुण, अवस्था तथा क्रिया के व्यापार का बोध करा रहे हैं। इसलिए ये 'भाववाचक संज्ञाएँ' हैं।

इस प्रकार-

जिन शब्दों से किसी प्राणी या पदार्थ के गुण, भाव, स्वभाव या अवस्था का बोध होता है, उन्हें भाववाचक संज्ञा कहते हैं। 
जैसे- उत्साह, ईमानदारी, बचपन, आदि । इन उदाहरणों में 'उत्साह'से मन का भाव है। 'ईमानदारी' से गुण का बोध होता है। 'बचपन' जीवन की एक अवस्था या दशा को बताता है। अतः उत्साह, ईमानदारी, बचपन, आदि शब्द भाववाचक संज्ञाए हैं।

हर पदार्थ का धर्म होता है। पानी में शीतलता, आग में गर्मी, मनुष्य में देवत्व और पशुत्व इत्यादि का होना आवश्यक है। पदार्थ का गुण या धर्म पदार्थ से अलग नहीं रह सकता। घोड़ा है, तो उसमे बल है, वेग है और आकार भी है। व्यक्तिवाचक संज्ञा की तरह भाववाचक संज्ञा से भी किसी एक ही भाव का बोध होता है। 'धर्म, गुण, अर्थ' और 'भाव' प्रायः पर्यायवाची शब्द हैं। इस संज्ञा का अनुभव हमारी इन्द्रियों को होता है और प्रायः इसका बहुवचन नहीं होता।

Sangya(Noun)(संज्ञा) | संज्ञा(Noun) के प्रकार | संज्ञाओं का प्रयोग |

(1) जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनाना

जातिवाचक संज्ञाभाववाचक संज्ञाजातिवाचक संज्ञाभाववाचक संज्ञा
स्त्रीस्त्रीत्वभाईभाईचारा
मनुष्यमनुष्यतापुरुषपुरुषत्व, पौरुष
शास्त्रशास्त्रीयताजातिजातीयता
पशुपशुताबच्चाबचपन
दनुजदनुजतानारीनारीत्व
पात्रपात्रताबूढाबुढ़ापा
लड़कालड़कपनमित्रमित्रता
दासदासत्वपण्डितपण्डिताई
अध्यापकअध्यापनसेवकसेवा

संज्ञा सम्बंधित मुख्य प्रश्न जो अधिकाश परीक्षाओं मे आये है 
(2)विशेषण से भाववाचक संज्ञा बनाना


विशेषणभाववाचक संज्ञाविशेषणभाववाचक संज्ञा
लघुलघुता, लघुत्व, लाघववीरवीरता, वीरत्व
एकएकता, एकत्वचालाकचालाकी
खट्टाखटाईगरीबगरीबी
गँवारगँवारपनपागलपागलपन
बूढाबुढ़ापामोटामोटापा
नवाबनवाबीदीनदीनता, दैन्य
बड़ाबड़ाईसुंदरसौंदर्य, सुंदरता
भलाभलाईबुराबुराई
ढीठढिठाईचौड़ाचौड़ाई
लाललाली, लालिमाबेईमानबेईमानी
सरलसरलता, सारल्यआवश्यकताआवश्यकता
परिश्रमीपरिश्रमअच्छाअच्छाई
गंभीरगंभीरता, गांभीर्यसभ्यसभ्यता
स्पष्टस्पष्टताभावुकभावुकता
अधिकअधिकता, आधिक्यगर्मगर्मी
सर्दसर्दीकठोरकठोरता
मीठामिठासचतुरचतुराई
सफेदसफेदीश्रेष्ठश्रेष्ठता
मूर्खमूर्खताराष्ट्रीयराष्ट्रीयता



(3)क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाना



क्रियाभाववाचक संज्ञाक्रियाभाववाचक संज्ञा
खोजनाखोजसीनासिलाई
जीतनाजीतरोनारुलाई
लड़नालड़ाईपढ़नापढ़ाई
चलनाचाल, चलनपीटनापिटाई
देखनादिखावा, दिखावटसमझनासमझ
सींचनासिंचाईपड़नापड़ाव
पहननापहनावाचमकनाचमक
लूटनालूटजोड़नाजोड़
घटनाघटावनाचनानाच
बोलनाबोलपूजनापूजन
झूलनाझूलाजोतनाजुताई
कमानाकमाईबचनाबचाव
रुकनारुकावटबननाबनावट
मिलनामिलावटबुलानाबुलावा
भूलनाभूलछापनाछापा, छपाई
बैठनाबैठक, बैठकीबढ़नाबाढ़
घेरनाघेराछींकनाछींक
फिसलनाफिसलनखपनाखपत
रँगनारँगाई, रंगतमुसकानामुसकान
उड़नाउड़ानघबरानाघबराहट
मुड़नामोड़सजानासजावट
चढ़नाचढाईबहनाबहाव
मारनामारदौड़नादौड़
गिरनागिरावटकूदनाकूद

संज्ञा सम्बंधित मुख्य प्रश्न जो अधिकाश परीक्षाओं मे आये है 
(4) संज्ञा से विशेषण बनाना


संज्ञाविशेषणसंज्ञाविशेषण
अंतअंतिम, अंत्यअर्थआर्थिक
अवश्यआवश्यकअंशआंशिक
अभिमानअभिमानीअनुभवअनुभवी
इच्छाऐच्छिकइतिहासऐतिहासिक
ईश्र्वरईश्र्वरीयउपजउपजाऊ
उन्नतिउन्नतकृपाकृपालु
कामकामी, कामुककालकालीन
कुलकुलीनकेंद्रकेंद्रीय
क्रमक्रमिककागजकागजी
किताबकिताबीकाँटाकँटीला
कंकड़कंकड़ीलाकमाईकमाऊ
क्रोधक्रोधीआवासआवासीय
आसमानआसमानीआयुआयुष्मान
आदिआदिमअज्ञानअज्ञानी
अपराधअपराधीचाचाचचेरा
जवाबजवाबीजहरजहरीला
जातिजातीयजंगलजंगली
झगड़ाझगड़ालूतालुतालव्य
तेलतेलहादेशदेशी
दानदानीदिनदैनिक
दयादयालुदर्ददर्दनाक
दूधदुधिया, दुधारधनधनी, धनवान
धर्मधार्मिकनीतिनैतिक
खपड़ाखपड़ैलखेलखेलाड़ी
खर्चखर्चीलाखूनखूनी
गाँवगँवारू, गँवारगठनगठीला
गुणगुणी, गुणवानघरघरेलू
घमंडघमंडीघावघायल
चुनावचुनिंदा, चुनावीचारचौथा
पश्र्चिमपश्र्चिमीपूर्वपूर्वी
पेटपेटूप्यारप्यारा
प्यासप्यासापशुपाशविक
पुस्तकपुस्तकीयपुराणपौराणिक
प्रमाणप्रमाणिकप्रकृतिप्राकृतिक
पितापैतृकप्रांतप्रांतीय
बालकबालकीयबर्फबर्फीला
भ्रमभ्रामक, भ्रांतभोजनभोज्य
भूगोलभौगोलिकभारतभारतीय
मनमानसिकमासमासिक
माहमाहवारीमातामातृक
मुखमौखिकनगरनागरिक
नियमनियमितनामनामी, नामक
निश्र्चयनिश्र्चितन्यायन्यायी
नौनाविकनमकनमकीन
पाठपाठ्यपूजापूज्य, पूजित
पीड़ापीड़ितपत्थरपथरीला
पहाड़पहाड़ीरोगरोगी
राष्ट्रराष्ट्रीयरसरसिक
लोकलौकिकलोभलोभी
वेदवैदिकवर्षवार्षिक
व्यापरव्यापारिकविषविषैला
विस्तारविस्तृतविवाहवैवाहिक
विज्ञानवैज्ञानिकविलासविलासी
विष्णुवैष्णवशरीरशारीरिक
शास्त्रशास्त्रीयसाहित्यसाहित्यिक
समयसामयिकस्वभावस्वाभाविक
सिद्धांतसैद्धांतिकस्वार्थस्वार्थी
स्वास्थ्यस्वस्थस्वर्णस्वर्णिम
मामाममेरामर्दमर्दाना
मैलमैलामधुमधुर
रंगरंगीन, रँगीलारोजरोजाना
सालसालानासुखसुखी
समाजसामाजिकसंसारसांसारिक
स्वर्गस्वर्गीय, स्वर्गिकसप्ताहसप्ताहिक
समुद्रसामुद्रिक, समुद्रीसंक्षेपसंक्षिप्त
सुरसुरीलासोनासुनहरा
क्षणक्षणिकहवाहवाई


(5) क्रिया से विशेषण बनाना

क्रियाविशेषणक्रियाविशेषण
लड़नालड़ाकूभागनाभगोड़ा
अड़नाअड़ियलदेखनादिखाऊ
लूटनालुटेराभूलनाभुलक्कड़
पीनापियक्कड़तैरनातैराक
जड़नाजड़ाऊगानागवैया
पालनापालतूझगड़नाझगड़ालू
टिकनाटिकाऊचाटनाचटोर
बिकनाबिकाऊपकनापका

संज्ञा सम्बंधित मुख्य प्रश्न जो अधिकाश परीक्षाओं मे आये है 
(6) सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा बनाना


सर्वनामभाववाचक संज्ञासर्वनामभाववाचक संज्ञा
अपनाअपनापन /अपनावममममता/ ममत्व
निजनिजत्व, निजतापरायापरायापन
स्वस्वत्वसर्वसर्वस्व
अहंअहंकारआपआपा



(7)क्रिया विशेषण से भाववाचक संज्ञा

मन्द- मन्दी;
दूर- दूरी; 
तीव्र- तीव्रता;
शीघ्र- शीघ्रता इत्यादि।

(8) अव्यय से भाववाचक संज्ञा

परस्पर- पारस्पर्य;
समीप- सामीप्य;
निकट- नैकट्य;
शाबाश- शाबाशी;
वाहवाह- वाहवाही 
धिक्- धिक्कार 
शीघ्र- शीघ्रता


समूहवाचक संज्ञा :- जिस संज्ञा शब्द से वस्तुअों के समूह या समुदाय का बोध हो, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते है।
जैसे- व्यक्तियों का समूह- भीड़, जनता, सभा, कक्षा; वस्तुओं का समूह- गुच्छा, कुंज, मण्डल, घौद।

द्रव्यवाचक संज्ञा :-जिस संज्ञा से नाप-तौलवाली वस्तु का बोध हो, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है।
दूसरे शब्दों में- जिन संज्ञा शब्दों से किसी धातु, द्रव या पदार्थ का बोध हो, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। 
जैसे- ताम्बा, पीतल, चावल, घी, तेल, सोना, लोहा आदि।


संज्ञाओं का प्रयोग

संज्ञाओं के प्रयोग में कभी-कभी उलटफेर भी हो जाया करता है। कुछ उदाहरण यहाँ दिये जा रहे है-

(क) जातिवाचक : व्यक्तिवाचक- कभी- कभी जातिवाचक संज्ञाओं का प्रयोग व्यक्तिवाचक संज्ञाओं में होता है। जैसे- 'पुरी' से जगत्राथपुरी का 'देवी' से दुर्गा का, 'दाऊ' से कृष्ण के भाई बलदेव का, 'संवत्' से विक्रमी संवत् का, 'भारतेन्दु' से बाबू हरिश्र्चन्द्र का और 'गोस्वामी' से तुलसीदासजी का बोध होता है। इसी तरह बहुत-सी योगरूढ़ संज्ञाएँ मूल रूप से जातिवाचक होते हुए भी प्रयोग में व्यक्तिवाचक के अर्थ में चली आती हैं। जैसे- गणेश, हनुमान, हिमालय, गोपाल इत्यादि।

(ख) व्यक्तिवाचक : जातिवाचक- कभी-कभी व्यक्तिवाचक संज्ञा का प्रयोग जातिवाचक (अनेक व्यक्तियों के अर्थ) में होता है। ऐसा किसी व्यक्ति का असाधारण गुण या धर्म दिखाने के लिए किया जाता है। ऐसी अवस्था में व्यक्तिवाचक संज्ञा जातिवाचक संज्ञा में बदल जाती है। जैसे- गाँधी अपने समय के कृष्ण थे; यशोदा हमारे घर की लक्ष्मी है; तुम कलियुग के भीम हो इत्यादि।

(ग) भाववाचक : जातिवाचक- कभी-कभी भाववाचक संज्ञा का प्रयोग जातिवाचक संज्ञा में होता है। उदाहरणार्थ- ये सब कैसे अच्छे पहरावे है। यहाँ 'पहरावा' भाववाचक संज्ञा है, किन्तु प्रयोग जातिवाचक संज्ञा में हुआ। 'पहरावे' से 'पहनने के वस्त्र' का बोध होता है।


संज्ञा के रूपान्तर (लिंग, वचन और कारक में सम्बन्ध)
संज्ञा विकारी शब्द है। विकार शब्दरूपों को परिवर्तित अथवा रूपान्तरित करता है। संज्ञा के रूप लिंग, वचन और कारक चिह्नों (परसर्ग) के कारण बदलते हैं।

लिंग के अनुसार

नर खाता है- नारी खाती है। 
लड़का खाता है- लड़की खाती है।

इन वाक्यों में 'नर' पुंलिंग है और 'नारी' स्त्रीलिंग। 'लड़का' पुंलिंग है और 'लड़की' स्त्रीलिंग। इस प्रकार, लिंग के आधार पर संज्ञाओं का रूपान्तर होता है।
वचन के अनुसार

लड़का खाता है- लड़के खाते हैं। 
लड़की खाती है- लड़कियाँ खाती हैं। 
एक लड़का जा रहा है- तीन लड़के जा रहे हैं।

इन वाक्यों में 'लड़का' शब्द एक के लिए आया है और 'लड़के' एक से अधिक के लिए। 'लड़की' एक के लिए और 'लड़कियाँ' एक से अधिक के लिए व्यवहृत हुआ है। यहाँ संज्ञा के रूपान्तर का आधार 'वचन' है। 'लड़का' एकवचन है और 'लड़के' बहुवचन में प्रयुक्त हुआ है।

कारक- चिह्नों के अनुसार

लड़का खाना खाता है- लड़के ने खाना खाया। 
लड़की खाना खाती है- लड़कियों ने खाना खाया।

इन वाक्यों में 'लड़का खाता है' में 'लड़का' पुंलिंग एकवचन है और 'लड़के ने खाना खाया' में भी 'लड़के' पुंलिंग एकवचन है, पर दोनों के रूप में भेद है। इस रूपान्तर का कारण कर्ता कारक का चिह्न 'ने' है, जिससे एकवचन होते हुए भी 'लड़के' रूप हो गया है। इसी तरह, लड़के को बुलाओ, लड़के से पूछो, लड़के का कमरा, लड़के के लिए चाय लाओ इत्यादि वाक्यों में संज्ञा (लड़का-लड़के) एकवचन में आयी है। इस प्रकार, संज्ञा बिना कारक-चिह्न के भी होती है और कारक चिह्नों के साथ भी। दोनों स्थितियों में संज्ञाएँ एकवचन में अथवा बहुवचन में प्रयुक्त होती है। उदाहरणार्थ-

बिना कारक-चिह्न के- लड़के खाना खाते हैं। (बहुवचन)
लड़कियाँ खाना खाती हैं। (बहुवचन)

कारक-चिह्नों के साथ- लड़कों ने खाना खाया। 
लड़कियों ने खाना खाया। 
लड़कों से पूछो। 
लड़कियों से पूछो। 
इस प्रकार, संज्ञा का रूपान्तर लिंग, वचन और कारक के कारण होता है।


Upsarg(Prefixes)(उपसर्ग) | उपसर्ग की परिभाषा (Prefixes)

उपसर्ग की परिभाषा (Prefixes)

उपसर्ग उस शब्दांश या अव्यय को कहते है, जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ प्रकट करता है।
दूसरे शब्दों में - जो शब्दांश शब्दों के आदि में जुड़ कर उनके अर्थ में कुछ विशेषता लाते है, वे उपसर्ग कहलाते है।
जैसे- प्रसिद्ध, अभिमान, विनाश, उपकार।

इनमे कमशः 'प्र', 'अभि', 'वि' और 'उप' उपसर्ग है।

यह दो शब्दों (उप+ सर्ग) के योग से बनता है। 'उप' का अर्थ 'समीप', 'निकट' या 'पास में' है। 'सर्ग' का अर्थ है सृष्टि करना। 'उपसर्ग' का अर्थ है पास में बैठाकर दूसरा नया अर्थवाला शब्द बनाना। 'हार' के पहले 'प्र' उपसर्ग लगा दिया गया, तो एक नया शब्द 'प्रहार' बन गया, जिसका नया अर्थ हुआ 'मारना' । उपसर्गो का स्वतन्त्र अस्तित्व न होते हुए भी वे अन्य शब्दों के साथ मिलाकर उनके एक विशेष अर्थ का बोध कराते हैं।

उपसर्ग शब्द के पहले आते है। जैसे -'अन' उपसर्ग 'बन' शब्द के पहले रख देने से एक शब्द 'अनबन 'बनता है, जिसका विशेष अर्थ 'मनमुटाव' है। कुछ उपसर्गो के योग से शब्दों के मूल अर्थ में परिवर्तन नहीं होता, बल्कि तेजी आती है। जैसे- 'भ्रमण' शब्द के पहले 'परि' उपसर्ग लगाने से अर्थ में अन्तर न होकर तेजी आयी। कभी-कभी उपसर्ग के प्रयोग से शब्द का बिलकुल उल्टा अर्थ निकलता है।

उपसर्ग के प्रयोग से शब्दों को तीन स्थितियाँ होती है-

(i)शब्द के अर्थ में एक नई विशेषता आती है;
(ii)शब्द के अर्थ में प्रतिकूलता उत्पत्र होती है,
(iii)शब्द के अर्थ में कोई विशेष अन्तर नही आता।


उपसर्ग की संख्या

हिंदी में प्रचलित उपसर्गो को निम्नलिखित भागो में विभाजित किया जा सकता है-
(1) संस्कृत के उपसर्ग
(2) हिंदी के उपसर्ग
(3) उर्दू के उपसर्ग
(4) अंग्रेजी के उपसर्ग
(5) उपसर्ग के समान प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के अव्यय

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